शनिवार, दिसंबर 27, 2008

" फ़िर कंधमॉल के बहाने : अबकी निशाने से "

कंधमाल के बाद और कंधमॉल से आगे अभी और भी है
बहुत दिनों तक प्रतीक्षा की परन्तु मेरे यक्ष- प्रश्न का उत्तर अभी तक नही मिला है |और सम्पूर्ण विश्व के "विश्वमय पति " जी की प्रकृति एवं :विचार-धारा के अन्य विद्वानों से ही किसी विद्वान् का उत्तर नही प्राप्त हुआ है | मगर मै " इसी ,उसी, यानी किसी किसी ' .....के बहाने से'फ़िर हाजिर हूँ |"

" मेरा सुधि पाठकों से विनम्र निवेदन है कि मेरी शंकाओं को दूर -दूर तक ' संक्रामक [छूत] ' के रोग की तरहफैला दें ,किसी भी भाषा- भाषी से उसी की भाषा में प्राप्त उत्तर भी मुझे स्वीकार है ,केवल उत्तर की भाषा को लेख में स्पष्ट करदे [जय हो गूगल बाबा के ट्रांसलेटर की ]|| "
मेरा बहाना अभी भी वही है यानि ......" कंधमाल के बहाने से ";

Read more...

बुधवार, दिसंबर 24, 2008

" कंधमाल के बहाने से "

"कंधमाल के बहाने से "

मैं अभी भी नही जानता कि कंधमाल उडीसा के किस हिस्से में है |बैठे ठाले13 अक्टोबर 2008 दिन सोमवार के दैनिकजागरण समाचार पत्र का सम्पादकीय पृष्ट हाथ लग गया,खोलने परदो लोग दिखे |पहले कोई इतिहास के परोफेसर श्री विश्वमय पति दिखे बड़ा सा बैनर

" वैसे अब नानी दादीयों का युग तो रह नही गया है ,अब इसकी जिम्मेदारी टी वी सीरियल बनाने वालों यथा रामा नन्द सागर और बी आर चोपडा की कंपनियों ने उठा ली है |"

यह तो हुई पुरानीदिल्ली स्टेशन पहुचने वाली ट्रेन की बात |अबबात करतें हैं नई दिल्ली या न्यू डेल्ही स्टेशन पहुँच ने की बात , यह तोप्रतीक मात्र है ,इसबात पर जोर देने के लिए कि भारतीय इतिहास को पढ़ने एवं
जानने की दूसरी राह मैक्समूलर के द्वारा दिया ब्रह्म ज्ञान ;कुछ लोगों कोभारतीय इतिहास का वही अन्तिम सच लगता है || जब हम यहीं पैदा होकर पूरेजीवन भर अपनी रस्मों परम्पराओं को देखते सुनते और निभाते रह कर भी उनकेपीछे छिपे भावार्थ को , कारणों को , उदेश्यों को रहस्यों को जान और समझ
नही पाते जब कि वे हमारी रोजमर्रा ज़िन्दगी से जुड़ी होतीं है | तो फ़िर भिन्न संस्कृति एवं परम्पराओं के पराये देश से आया , कुछ समय से इन सब केसंपर्क में रहा व्यक्ति इनका विशेषज्ञ कैसे हो सकता है ?

जब कम्युनिस्ट कहतें है ' धर्म समाज कि अफीम है ' तो समझ में आता है ,क्यों कि धर्म कि आड़ में समाज के दबे -कुचले ,सामाजिक रूप से पिछडे लोगों पर बहुत अत्याचार किया गया है उनके साथ अनाचार किया गया था | परन्तु इसमें धर्म का क्या दोष ? खैर इस सिलसिले को आगे बढाते हुए कोई मुझे बताएगा की श्री विश्वमय पति द्वारा उल्लिखित ये " हिन्दू " क्या या कौन हैं ;ये चर-अचर ; जीव- निर्जीव क्या हैं , यह शब्द बहुत दिनों से विभिन्न सन्दर्भों में सुनता चला आरहा हूँ |

Read more...

"रोमन[अंग्रेजी]मेंहिन्दी-उच्चारण टाइप करें:

"रोमन[अंग्रेजी]मेंहिन्दी-उच्चारण टाइप करें: नागरी हिन्दी प्राप्त कर कॉपी-पेस्ट करें "

विजेट आपके ब्लॉग पर

======================================================= =======================================================
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

  © Blogger template The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP